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Arpita Sahoo

Abstract

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Arpita Sahoo

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वक्त का आईना

वक्त का आईना

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आज फिर जिंदगी का वह मोड़ सामने आ खड़ा है

जहां आशा नहीं सिर्फ निराशा का मंज़र नजर आ रहा है


आज फिर इंसान इंसानियत को तड़प रहा है

आज फिर इस दिल में जीने की तमन्ना जग रही है


क्या है मेरा वजूद ?

क्या है मेरी पहचान ?


ये वो सवाल हैं...

जिनका जवाब सिर्फ़ वक्त का तजुर्बा है


मगर वक्त किसी का इंतजार नहीं करता

और इंसान वक्त की कद्र नहीं करता



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