STORYMIRROR

ritesh deo

Abstract

4  

ritesh deo

Abstract

वो और उसके रूप

वो और उसके रूप

1 min
321

उसकी सब बात निराली है

वो फूलों से भरी एक डाली है


जग कहता जिसको घरवाली है

वो जीवन बगिया की माली है


वो रौद्र भी है और भोली भाली है

करती सबकी रखवाली है


वो शक्ति स्वरूपा मतवाली है

वो ही काली खप्परवाली है


उससे हर दिन होली दिवाली है

वो लक्ष्मी और सिंह सवारी वाली है


वो ही हर सुख की दायिनी

वो कुष्मांडा कात्यायिनी


वो अतुल्य प्रेमदात्री है

वो दुर्गा और कालरात्रि है


वो सृष्टि की जन्मदात्री है

वो शैलपुत्री और सिद्धिदात्री है


सब की वो संकटहारिणी

वो महागौरी और ब्रह्मचारिणी है


जिससे सबका अटूट नाता है

वो चंद्रघंटा और स्कंधमाता है


वो अपना हर रिश्ता निभा रही

सबको त्याग और समर्पण सिखा रही।

             


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract