STORYMIRROR

Diwa Shanker Saraswat

Tragedy Inspirational Thriller

4  

Diwa Shanker Saraswat

Tragedy Inspirational Thriller

वंदनीय दुख

वंदनीय दुख

1 min
733

दिन और रात

चलते साथ साथ

एक के बाद

पुनरावृत्ति दूसरे की

दिन दिन लगता

रात दिखती जगत को

बिन रात क्या दिन

एक सा अनुभव


अंधेरा जरूरी उतना

प्रकाश है जितना

दुख तो मिले सबको

खुद कहानी भगवान की

कहानी दुखों से भरी

कठिनाई भरा जीवन


बोध पा सिद्धार्थ बनते बुद्ध

दुनिया को देते ज्ञान

संसार में दुख है

बताते दुख अपरिहार्य है

सुखों में हो मदहोश


नया कौन रचता

दुख तराशता हीरों को

कई जयशंकर, महादेवी

निराला, लिंकन

गांधी और मंडेला

को दुनिया को देता

दुख कोई शैतान नहीं

वंदनीय ईश सम।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy