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Akhtar Ali Shah

Abstract

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Akhtar Ali Shah

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वक्त कटे आराधन में

वक्त कटे आराधन में

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नमक मिर्च से रोटी खाओ,

वक्त कटे आराधन में।

बचो पांच पकवान से मित्रों,

सुख पाओगे जीवन में।


रखी जरूरत कम अपनी तो, 

सुख दुगुना हो जाएगा।

साधारण जीवन जीना ये,

खुद परवाज़ बढ़ाएगा।


विलासिता के सपनों को तुम, 

उगने मत दो आंगन में।

बचो पांच पकवान से मित्रों,

सुख पाओगे जीवन में।


कोरोना ने दुखी बनाया,

इसको तुम वरदान करो।

तुम तन्हाई को भी अपनी, 

उन्नति का सामान करो। 


दूर दूर पर पेड़ लगाओ,

खूब फलेंगे गुलशन में।

बचो पांच पकवान से मित्रों, 

सुख पाओगे जीवन में।


शुद्ध वायु हो गई आज तो, 

और शुद्ध अब पानी है। 

तडक भडक के बिना जिन्दगी, 

में कितनी आसानी है।


पत्थर भी पिघले देखे हैं, 

हमने इस परिवर्तन में।

बचो पांच पकवान से मित्रों, 

सुख पाओगे जीवन में।


रोग घटे घर पर रहने से, 

हुई निरोगी काया है।

मन खाकी का भी बदला है, 

डॉक्टर में रब आया है।


भाग दौड़ से हम"अनंत" अब, 

आए हैं अपनेपन में।

बचो पांच पकवान से मित्रों, 

सुख पाओगे जीवन में।


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