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Akhtar Ali Shah

Inspirational


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Akhtar Ali Shah

Inspirational


जिसे डॉक्टर हम कहते हैं

जिसे डॉक्टर हम कहते हैं

2 mins 278 2 mins 278


घोर उदासी की जमीन पर ,

जीवन देने वाला है ।

जिसे डॉक्टर हम कहते हैं,

कैसा रूप निराला है ।।

******

दर्द बांटने का जो करते ,

काम धनी हैं किस्मत के।

गर्मी में सुख पहुँचाते हैं,

बनकर वो पंखे छत के ।।

दुख किस्मत का होता है पर,

सहने की ताकत पाकर ।

जीवन रण में विजय पताका ,

फहराते रोगी जाकर ।।

ये जादू का काम करें वो,

जो सबका रखवाला है ।

जिसे डॉक्टर हम कहते हैं,

कैसा रूप निराला है ।।

******

संक्रामक रोगों के कारण,

जान हथेली पर रहती ।

कफन बांध के लगे रहो पर, 

यही चेतना तो कहती ।।

कोरोना के कठिन काल में,

सुख सुविधाएं सब देकर ।

लगे हुए हैं डॉक्टर सारे,

सेवा का ही व्रत लेकर ।।

दिल है मोम मगर लोहे ने,

उनके तन को ढाला है ।

जिससे डॉक्टर हम कहते हैं ,

कैसा रूप निराला है ।।

*****

माना वो अब नहीं रहे जो,

देख नाड़ियां व्याधि हरें ।

पर जब सारे टेस्ट सुलभ हों,

क्यों ना वो उपयोग करें ।।

हो इलाज कितना भी महंगा,

राहत से सस्ता होता ।

मुक्त कष्ट से करें देह को ,

सफल वही रस्ता होता ।।

पृष्ठ कोई उसकी पुस्तक का,

भी हो सकता काला है।

जिसे डॉक्टर हम कहते हैं,

कैसा रूप निराला है ।।

******

काम नहीं छोटा कोई गर ,

सेवा समझ किया जाए ।

फिर जो जीवन देने का हो,

क्यों ना रब को वो भाए ।। 

इंसानी कमजोरी सबमें ,

होती है वो छोड़े हम ।

दुःख जो हरले पीर वही है,

नाता उससे जोड़ें हम ।।

"अनन्त"जो तम रोशन कर दें,

सच्चा वही उजाला है ।

जिसे डॉक्टर हम कहते हैं ,

कैसा रूप निराला है ।


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