विष्णु के सोलह नाम
विष्णु के सोलह नाम
*ऊँ विष्णवे नमः। *
*हे ! नाथ अनाथ पड़ा जग में , तन जर्जर मोहि सतावत है,
*तन व्याधि अनेक समाई गई , माया मुझको भरमावत है,
*हे ! विष्णु हरो संताप मेरो ,मन व्यथित तोहे गोहरावत है,
*तव नाम जपे सब त्रास मिटे , भ्रम के बदली छंट जावत है।।1।।
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*ऊँ जनार्दनाए नमः। *
*हे ! नाथ जनार्दन मोरे प्रभो , आसन पर आन विराजो जी,
*लाया हूँ मैं थाल सजाकर , आकर घर भोग लगाओ जी,
*जो है नाथ दिया तेरा ही , अब मत देर लगाओ जी,
*भूखे पेट न सोने देना , नेह सहज बरसाओं जी।।2।।
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*ऊँ पद्मनाभाय नम: *
*शेषनाग पर शयन हो करते , पद्मनाभ सुख शांति करो,
*नाम तुम्हारा दिव्य अलौकिक प्रेम भक्ति का भाव भरो,
*लेकर नाम शयन नित करता ,जीवन को भयमुक्त करो,
*हे ! लक्ष्मीपति सुनो नाथ मोहि , भव बंधन से मुक्त करो।।3।।
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*ऊँ प्रजापतये नमः। *
*हे!देव प्रजापति तुम देना , आशीष निबाहूँ वचन सभी,
*बढ़े कदम जीवनपथ में , ना भटक मैं जाऊॅं नाथ कभी,
*मंगल हो प्रभुवर पाणिग्रहण साक्षी रखता हूँ तुम्हें अभी,
*जीवनसाथी से प्यार मिले दुःख की छाया ना पड़े कभी।।4।।
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*ऊँ वासुदेवाय नमः*।
*हे ! नाथ हृदय ही अब मेरा , है बना हुआ एक कुरूक्षेत्र,
*लड़ रहा पार्थ के भांति नाथ , अन्तर्द्वन्दों में घिरा क्षेत्र,
*इच्छाएं भीष्म सी हैं अजेय , लाचार पांडवों का है शस्त्र,
*निज हाथ सुदर्शनचक्र धरो,चक्रधर आ जारो समर क्षेत्र।।5।।
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हे ! देव त्रिविक्रम साथ रहो , मैं निकल रहा हूँ यात्रा पर,
हे ! नाथ हाथ निज हाथ रखो , चलता हूँ पथरीले पथ पर,
विश्वास हृदय में है तुम पर , साथ सदा रहना प्रभुवर,
कहीं फिसल न जाएं पग मेरे , जीवन के टेढ़े-मेढ़े पथ पर।।6।।
ऊॅं नारायणाय नमः
तन पाप किए अनजाने में , हे!नारायण सब पाप हरो,
मन तड़प रहा है शैया पर , हे ! नारायण संताप हरो,
है दग्ध हृदय अब पछताए,हे! नाथ हृदय की त्रास हरो,
निज चरण शरण दीजै मोहे,भव सागर से हरि पार करो।।7।।
ऊॅं श्रीधराय नमः
वरदान मुझे दीजै भगवन् , दाम्पत्य हमारा बना रहे,
मैं नाम जपूं श्रीधर श्रीधरं, सुहाग सदा ही बना रहे,
निकले जब प्राण सदा संग में प्रीत हमारा बना रहे,
आशीष मोहे दीजौ भगवन् अनुराग हृदय में बना रहे।।8।।
ऊॅं गोविन्दाय नमः
गोविन्द भजो गोपाल भजो , दुस्वप्न कभी ना आएंगे,
भजते भजते जब ऑंख लगे, गोविन्द खड़े मुस्काएंगे,
आनन्द भरेंगे जीवन में , भयमुक्त प्रभु कर जाएंगे,
गोविन्द कृष्ण गोपाल जपो , हरि स्वयं जगाने आएंगे।।9।।
ऊॅं मधुसूदनाय नमः
संकट के बादल मरड़ाए , देखत मन मोरा घबराए,
संकटमोचक हे! मधुसूदन, तुमसे बादल ये छंट जाए,
जब लगी पुकारन मधुसूदन, यज्ञसैनी के लाज बचाए
संकट काटो मम मधुसूदन,हर वक्त हृदय तुमको ध्याए।।10।।
ऊॅं नृसिंह देवाय नमः
कंण-कंण में तेरा वास प्रभु , खड्ग खम्भ में हो रहते,
मन से जो भजता है तुमको, नृसिंह कृपा उसपे करते,
छल छद्म द्वेष के जंगल में , जब भक्त तुमको भजते,
आते लेकर नृसिंह रूप , हरि भक्तन की रक्षा करते।।11।।
ऊॅं जलाशयी नमः
चहुंओर लगा है आग प्रभु , शेषनाग को त्याग प्रभु,
जलाशयी जल बरसाओ ,रखो जीवन की लाज प्रभु,
विकराल अग्नि के लपटों से जीव जन्तु सब व्याकुल हैं,
जीवन धन हाथ तुम्हारे है , आकर त्रयताप मिटाओ प्रभु।।12।।
ऊॅं वाराहवै नमः
ग्राह ग्रसे गज को जल में , तव नाथ गुहार कियो गज ने,
क्षण माहि प्रकट होके प्रभु ने दुख दूर किये मेरो हरि ने
जल में जब डूब रही धरती , वाराह अवतार लिए तुमने,
जब डूब रहा था यह जीवन , संकट से पार किए प्रभु ने।।13।।
जय जय रघुनंदन
सुग्रीव को राज दिए रघुवर , मारे बाली रघुनंदन ने,
शबरी को तार दिए रघुवर ,मारे निसिचर भवभंजन ने,
पर्वत-पर्वत दर-दर भटकूं , रघुराई राह दिखा जाओ,
मन से आह्वान किया जिसने , टारे संकट रघुनंदन ने।।14।।
ऊॅं वामनाय नमः
दो डग में नापे सकल लोक , तीजै डग बलि के शीष रखे,
बलि को देखा वचनबद्ध , हरि मन ही मन मुस्कात दिखे,
होकर प्रसन्न वामन प्रभु जी ,पाताल दिया राजा बलि को,
हे!नाथ बचाओ मान प्रभो , भक्तों को तुम बिन कौन दिखे।।15।।
ऊॅं माधवाय नमः
हे !माधव मोहन कृष्ण हरे , तू सब काज को सिद्ध करे,
हे ! कुॅंजबिहारी श्याम हरे , भजते सब बाधा दूर करे,
हे! नाथ गोवर्घन तुम धारे , गोकुल में संकट थे टारे,
सुमिरन तेरो जो भक्त करे , प्रभु जीवन में आनंद भरे।।16।।
