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Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

विष के प्याले में

विष के प्याले में

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विष के 

प्याले में 

विष भरना था 

सोचा जंगल जाकर 

सर्प को ढूंढूं या

अपने ही नगर में 

किसी जहरीले इंसान को 


किसी सर्प को देखने से 

लगता नहीं कि 

यह विषैला होगा 

जब तक उसे कोई छेड़े नहीं 

वह फुफकार मारता हुआ फिर 

उसे डसे नहीं और फिर 

जिसे डसा तो 

जब तक वह मरे नहीं लेकिन 

एक जहरीला इंसान तो 

सक्षम है 


दक्ष है

समक्ष है 

अपनी कड़वी बोली से 

किसी का दिल छलनी करने में 

धधकती आंखों के अंगारों से 

किसी को जलाने में 

अपने लोहे से कठोर आघातों से 

किसी को जिस्मानी नुकसान 

पहुंचाने में 

अपने चेहरे से लहू टपकाते हुए 

किसी की आत्मा को 


तनाव के घेरे से पाटने में 

अपने शरीर की नस नस में 

दौड़ते जहर के दरिया में 

किसी को भी गहरा डूबाकर 

विषैली गहरी नींद सुलाने में।


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