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Sunita Shukla

Abstract Inspirational

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Sunita Shukla

Abstract Inspirational

विश्वास की रश्मियाँ

विश्वास की रश्मियाँ

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जिन बातों को किस्से कहानियों में सुनते थे...

कुछ ऐसा ही वाकया आज सामने दिख गया।

एक पिता जिसे अभी सहारे की जरूरत थी....

लेकिन फिर उसे समय ने बेटे का सहारा बना दिया।।


दिल में गहरी उदासी के घनघोर अँधेरे साये लिये.....

चिंता की चपल दामिनी तन-मन को झुलसाती ...

पर फिर भी मुखमंडल पर विश्वास की दमकती रश्मियाँ...

क्योंकि वह पिता जानता था ....

निराशा की एक झलक....

उस मासूम के सपनों को तितर-बितर कर देगी,


इसलिये तो सहता रहा सहस्त्र बिच्छुओं के डंक सा गम

शरीर ही नहीं आत्मा भी है लहूलुहान.....

लेकिन नहीं कोई क्रंदन.. 

खड़ा दोनों कर जोड़.....ईश्वर के समक्ष....

अवनत....प्रतीक्षारत...

जीर्ण-शीर्ण काया में साँसें भरते पुत्र के लिये.....

एक सुखद जीवन की आस....!!


जिन्दगी की भी कुछ ऐसी ही अजब कहानी है,

कभी टूटती, कभी बिखरती, तो कभी.....

आशाओं की नन्हीं बूँदों से भरी.....

बल्लियों उछलती, अठखेलियाँ करती......

ताजगी से भरपूर नदियों की रवानी।।


और फिर यहाँ तो संघर्ष एक पिता का है...

जो संतान की भयावह पीड़ा देखकर....

मन ही मन छटपटाता है किंतु कभी...

आँखों में नहीं लाता है ....

अश्रु की कोई बूँद....

मानो दे जाती है जिन्दगी जीने की सीख।।


माना कि नदी का उद्गम बहुत छोटा होता है, 

किंतु ...जैसे-जैसे ये आगे बढ़ती हैं, 

धर विशाल रूप....

धैर्य की ओढ़े चादर उछलती जाती है...

मिल जाने को सागर में।।


उसी तरह विश्वास की डोर भी ...

दिखती है थोड़ी सी नाज़ुक.....

पर जिसने थाम लिया

समझो वह पार हुआ...।।


वैसे भी यूँ ही नहीं मिलती राही को मंज़िल

एक जुनून सा दिल में जगाना होता है।

सीख लें बेज़ुबान पंछियों से, 

कैसे बनाते आशियाना.... 

भर कर ऊँची उड़ान हर बार..

तिनका-तिनका उठाना होता है।।


हमें भी अपनी आखिरी सांस तक लड़ना है... 

परेशानियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों ....

मन में रख विश्वास......

आत्मविश्वास से किये गए संघर्ष के बाद 

जीत निश्चित है.......।।

             


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