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Vibha Pathak

Tragedy

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Vibha Pathak

Tragedy

विरोध हमेशा अवरोध उत्पन्न करता है।। विभा पाठक

विरोध हमेशा अवरोध उत्पन्न करता है।। विभा पाठक

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विरोध हमेशा अवरोध उत्पन्न करता है"

एक तजुर्बा मेरा ज़िंदगी से..


हर कोई अपने आप को बेहतर बताता है बनाता नहीं,

एक लड़की को हमेशा से दो ही अवसर दिये जाते है जैसे की मुझे मिला था,

या तो पिता या प्रेमी तीसरा रास्ता कोई होता नहीं।। 

किसी एक का चुनाव करने से दूसरे के प्रति अन्याय साबित होता है।।


आख़िर में उसको मिलती है ढेर सारी उपाधियाँ या तो वो कहलायेंगी भागी हुई चरित्रहीन लड़की या प्रेमी पक्ष द्वारा बड़े भारी भरकम वाले शब्द, 

किंतु असल ज़िंदगी में उन लड़कियों को समझने वाला कोई नही होता है।।

खैर समाज पक्का उन लड़कियों को महान पुकारता होगा जो समाज द्वारा बनाई गयी सभी नियम कानून को मानती होंगी, और उन लड़कियों का बहिष्कार किया जाता होगा जो अपनी पसंद को प्राथमिकता देती होंगी।। 


पापा ने समझाया था कि ना हम कुछ लाए थे, ना हम कुछ देंगे, 

बेटी इसी तरह तो हम समाज को बदलेंगे, 


पर आप गलत थे पापा" क्योंकि दहेज तो गरीब से गरीब बाप भी देता है ये बात बाद में पता चलता है।। 


पढ़ाया लिखाया ताकि मैं कुछ कर सकु पर आप गलत थे "शायद आपको रसोई का काम सिखाना था" और 

"ननद के पाव में तेल कैसे लगाते हैं ये बताना था"

पर किस्मत थोड़ी अच्छी थी, 

पति ने नौकरी पे लगाया, नौकरी करनी है तो करो

पर घर के काम में कमी ना रहे.


एक ही ऑन्टी थी सफाई के लिए पर उनके साथ सफाई करना जरूरी है ये बात सिखाई जाती थी, 

कोशिश करो

जल्दी उठो, 

सफाई करो, 

नास्ता बनाओ, 

लेट हो जाओ पर लंच बना कर ही ऑफिस जाओ, Dinner पे टाइम से आ जाओ, क्योंकि हम जल्दी खा लेते हैं, 


"नौकरी तुमने करी है तुम भुगतों " हर वक्त सुनने को मिलता है।। 

क्यूँ है ऐसा आज भी समाज बस अपनी बेटियों के लिए बदलता है, 

हर रोज ये लावा मन में सुलगता है, 

ये पहनो

बाल ऐसे बनाओ, 

नहाने में 2 घंटे मत लगाओ, 

सब्जी में नमक ज़्यादा है तो सबके सामने क्लास लगाओ, 


लव मैरिज थी तो सबको लगा जो चाहे करे इसके साथ क्योंकि अब कोई नही है इसके पास।। 


(शादी करना कोई बड़ी बात नही, लेकिन निभाना बहुत बड़ी बात होती है और ये सिर्फ औरतों पर ही लागू होती है) 


(परेशानियों को भी बताइये आप मुस्कुरा कर हर तकलीफ़ को पार कर सकते हैं लेकिन ज़्यादा मुस्कुराने से गाल दर्द करते हैं, रो भी नही सकते कही आँखों को तकलीफ़ न हो जाए)

समाज और परिवार द्वारा खूब ढेर सारा रुपया पैसा देकर या तो लड़की ख़रीदी जाती हैं या फ़िर अच्छी खासी रकम लेकर कही दूर शहर में विवाह करा दिया जाता हैं, और परिवार ये समाज सभी राज़ी ख़ुशी अपना जीवन यापन करते है।। 


बगावती लड़कियाँ जन्म से ऐसी नही होती बस थोड़ा पढ़ाई लिखाई कर लेती है तो उन्हें ज्ञान हो जाता है अपने अधिकारों का खैर हमेशा और युगों युगों से चला आया है, 

विरोध हमेशा अवरोध उत्पन्न करता है तो चुप चाप एक संस्कारी लड़की बने रहिये या मन है बगावत करने का तो सोच लीजिये... 

"ये समाज नही आसां इतना तो समझ लीजिये एक आग का दरिया है और जल भुन के मरना है।"


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