मैं काशी हो चला हूं
मैं काशी हो चला हूं
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इश्क़ ए बनारस में अस्सी घाट हो चला हूं
मुर्दों को मोक्ष देने मणिकर्णिका श्मशान हो चला हूं।।
मुहब्बत ए दौर में भी इश्क़ का सलीका न आया
मेरे मालिक देख मैं अब काशी हो चला हूं।।
