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Vibha Pathak

Others

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Vibha Pathak

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मैं काशी हो चला हूं

मैं काशी हो चला हूं

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इश्क़ ए बनारस में अस्सी घाट हो चला हूं

मुर्दों को मोक्ष देने मणिकर्णिका श्मशान हो चला हूं।।


मुहब्बत ए दौर में भी इश्क़ का सलीका न आया 

मेरे मालिक देख मैं अब काशी हो चला हूं।।


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