हिंदी आधुनिक युग है
हिंदी आधुनिक युग है
मैं आधुनिक युग की शायद ना लगूँ क्योंकि मुझे पसंद है माथे पर छोटी सी बिंदी और बोली में हिंदी
मुझे मेरे बात - व्यवहार, बोल - चाल और पोशाक से ये ज़रूर समझना की मैं गाँव से हूँ
और होगा ये सम्मान मेरे लिए की तुम मेरे ज़रिये ही सही कम से कम गाँव की धरोहर को तो समझते हो.
और यकीं मानों मेरा तुम भी गाँव जाने को तरसते हो
पता है वो सुबह की पहली किरण वो चूल्हे की रोटियाँ
वो धीरे धीरे कानों में पड़ने वाली मंदिर की घंटियाँ
वो सब कुछ मुझे पसंद है, और मुझसे जुड़ा भी तो
कैसे छोड़ दु ये सब जो नही पसंद अगर इसके साथ मैं आधुनिक नही तो उनके बारे में क्या ख्याल जो विदेशों से लोग आके हमारे यहाँ अपनाते है हमारी धरोहर को...
या शायद वो आधुनिक युग के नही..
