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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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विद्यार्थी जीवन

विद्यार्थी जीवन

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किसी साधना किसी तपस्या से कम नहीं, विद्यार्थी जीवन हमारा,

ज्ञान चिंतन से स्वयं को सुदृढ़ बनाने का होता ये अवसर सुनहरा।


घर की चारदीवारी की दुनिया से निकल विस्तृत खुले आसमां में,

विद्या और अनुशासन के साथ प्रकाशमय होता है जीवन हमारा।


नए-नए लोग नए सहपाठी, शिक्षक व नए वातावरण से परिचय,

साथ ही साथ सीखते इस जगत में क्या है अच्छा और क्या बुरा।


विद्यार्थी जीवन में प्रवेश करते ही तीव्र होती जाती ज्ञान पिपासा,

ज्ञान प्राप्ति के साथ इसी काल में होता चरित्र भी निर्माण हमारा।


केवल पुस्तकों का ज्ञान व गुरुजनों के मुख से सुनी बातें ही नहीं,

विद्यार्थी जीवन ग्रहण करता है, आसपास निहित ज्ञान भी सारा।


गुरु से ज्ञान जो मिलता विद्यार्थी जीवन में उससे आती विनम्रता,

सम्मान करना सीखते बड़ों का, व्यक्तित्व उज्जवल होता हमारा।


गुण अवगुण पाप पुण्य धर्म अधर्म और सत्य असत्य से भी तो,

विद्यार्थी जीवन काल ही एक संपूर्ण परिचय करवाता है हमारा।


ज़िन्दगी का खूबसूरत पल होता है विद्यार्थी जीवन का ये सफ़र,

स्वर्णिम काल होता है ये, बनता जो कितनी ही यादों का पिटारा।


विद्यार्थी जीवन के अनगिनत किस्से, जिसकी तस्वीर आज भी,

जीवंत दिल में,चाहकर भी इन यादों से कर सकते नहीं किनारा।


विस्तृत इस जगत को जानने और समझने की असीम तृष्णा में,

सहर्ष चुनौतियांँ कर लेता था स्वीकार, जिज्ञासु बाल मन हमारा,


किताबी ज्ञान ही नहीं, खेलकूद डिबेट चित्रकला, संगीत क्राफ्ट,

सहपाठियों के साथ सब सीखना, था ये अनुभव बड़ा ही प्यारा।


खेल-खेल में सीखना, एक दूसरे की मदद को सदैव तैयार रहना,

मिल बांटकर खाना कितना ख़ूबसूरत हुआ करता था वो नज़ारा।


पक्के गहरे दोस्त मिले विद्यार्थी जीवन में जो आज तक हैं साथ,

जिनके साथ बीता विद्यार्थी जीवन का, हर एक लम्हा था प्यारा।


लड़ते झगड़ते दोस्तों के साथ, फिर भी सीख लेते थे अनुशासन,

गणित की जटिलताओं से सीखा संघर्षमय है यह जीवन हमारा।


विज्ञान की समझ, भाषा का ज्ञान, समय का महत्व जाना हमने,

पढ़ाई के साथ-साथ मस्ती का भी हम वक्त निकाल लेते थे पूरा।


जीवन की पूंजी होती हैं, विद्यार्थी जीवन की ये खट्टी मीठी यादें,

व्यक्तित्व निर्माण और जीवन जीना सीखा है हमने जिसके द्वारा।


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