STORYMIRROR

Rishabh kumar

Abstract

4  

Rishabh kumar

Abstract

वही नायक कहलाता है

वही नायक कहलाता है

1 min
499

हार में

तिरस्कार में

लोगों के बहिष्कार में

उन्नति के पथ पर

जो निश्चल 

निष्काम खड़ा रहता है

वही नायक कहलाता है


प्यार में

पुरस्कार में

पाया जो अधिकार में

प्रगति के रथ पर

जो निश्छल

निर्भाव सवार रहता है

वही नायक कहलाता है


भाव में

अभाव में

निज धरम की छाँव में

रक्षा की तलवार

जो निर्विकार

बलिष्ठ हाथों में रखता है

वही नायक कहलाता है


भाषा में

परिभाषा में

चेतना की अभिलाषा में

देश की संस्कृति को

जो अक्षुण

अविरल बनाये रखता है

वही नायक कहलाता है


हिंसा में

प्रतिहिंसा में

अविरल शुद्ध अहिंसा में

उबलते वीर सेनानी को

जो अनुशासित

शासित निर्लेप रखता है

वही नायक कहलाता है


भंंग में

विध्वंस में

अटूट छिड़े जंग में

परोक्ष या प्रत्यक्ष हो

 रुके झुके बिन

जो मुहतोड़ उत्तर रखता है

वही नायक कहलाता है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract