वहां ज़िन्दगी खड़ी थी।
वहां ज़िन्दगी खड़ी थी।
कुछ थे सवाल तेरे तो कुछ थे सवाल मेरें ।
कुछ थे जवाब मेरें तो कुछ थे जवाब तेरे ।
परेशानियों के साये हम दोनों को ही थे घेरें ।।1।।
कुछ तेरी शिकायत थी कुछ मेरी शिकायत थी ।
कुछ मेरी शराफत थी कुछ तेरी शराफत थी ।
हर सम्त से आई थी वह कैसी क़यामत थी ।।2।।
कुछ मेरी मुहब्बत थी कुछ तेरी मुहब्बत थी ।
कुछ तेरी जरूरत थी कुछ मेरी जरूरत थी ।
हम चाहतें तो मिल जाते अभी बाकी गनीमत थी ।।3।।
कुछ तुममें दूरियाँ थीं कुछ हममें दूरियाँ थीं ।
कुछ तुममें गल्तियाँ थीं कुछ हममें गल्तियाँ थीं ।
मजधार में फसीं हम दोनों की ही कश्तियाँ थीं ।।4।।
कुछ तो तेरी कमी थीं कुछ तो मेरी कमी थीं ।
आँखो ंमें मेरे भी नमी थीं आँखों में तेरे भी नमी थीं ।
मिल बाँट कर जी लेते वह हम दोनों की जिन्दगी थीं ।।5।।
कुछ तो मेरी रजा थी कुछ तो तेरी रजा थी ।
हमने भी जी सजा थी तुमने भी जी सजा थी ।
हर चीज़ की वजा थी कुछ भी ना बे वजा थी ।।6।।
तुम भी थे फुरसत में हम भी थे फुरसत में ।
हम भी थे गुरबत में तुम भी थे गुरबत में ।
तुम्हें मुबारक हो ये ज़िन्दगी हम तो हैं अब कुरबत में ।।7।।
कुछ तुमनें भी सुनी थी कुछ हमनें भी सुनी थी ।
आवाज थी वो मेरी और आवाज थी वो तेरी ।
पीछे ना मुड़के देखा किसी ने वहाँ ज़िन्दगी खड़ी थी ।।8।

