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Taj Mohammad

Romance

4  

Taj Mohammad

Romance

वहां ज़िन्दगी खड़ी थी।

वहां ज़िन्दगी खड़ी थी।

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कुछ थे सवाल तेरे तो कुछ थे सवाल मेरें ।

कुछ थे जवाब मेरें तो कुछ थे जवाब तेरे ।

परेशानियों के साये हम दोनों को ही थे घेरें ।।1।।


कुछ तेरी शिकायत थी कुछ मेरी शिकायत थी ।

कुछ मेरी शराफत थी कुछ तेरी शराफत थी ।

हर सम्त से आई थी वह कैसी क़यामत थी ।।2।।


कुछ मेरी मुहब्बत थी कुछ तेरी मुहब्बत थी ।

कुछ तेरी जरूरत थी कुछ मेरी जरूरत थी ।

हम चाहतें तो मिल जाते अभी बाकी गनीमत थी ।।3।।

 

कुछ तुममें दूरियाँ थीं कुछ हममें दूरियाँ थीं ।

कुछ तुममें गल्तियाँ थीं कुछ हममें गल्तियाँ थीं ।

मजधार में फसीं हम दोनों की ही कश्तियाँ थीं ।।4।।


कुछ तो तेरी कमी थीं कुछ तो मेरी कमी थीं ।

आँखो ंमें मेरे भी नमी थीं आँखों में तेरे भी नमी थीं ।

मिल बाँट कर जी लेते वह हम दोनों की जिन्दगी थीं ।।5।।


कुछ तो मेरी रजा थी कुछ तो तेरी रजा थी ।

हमने भी जी सजा थी तुमने भी जी सजा थी ।

हर चीज़ की वजा थी कुछ भी ना बे वजा थी ।।6।।


तुम भी थे फुरसत में हम भी थे फुरसत में ।

हम भी थे गुरबत में तुम भी थे गुरबत में ।

तुम्हें मुबारक हो ये ज़िन्दगी हम तो हैं अब कुरबत में ।।7।।


कुछ तुमनें भी सुनी थी कुछ हमनें भी सुनी थी ।

आवाज थी वो मेरी और आवाज थी वो तेरी । 

पीछे ना मुड़के देखा किसी ने वहाँ ज़िन्दगी खड़ी थी ।।8।


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