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V. Aaradhyaa

Action Classics Thriller

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V. Aaradhyaa

Action Classics Thriller

वैतरणी पार कराती निर्मला हूँ

वैतरणी पार कराती निर्मला हूँ

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शक्ति से बनी हुई और मेहनत से कसी हुई बला हूँ

अपना अस्तित्व तलाश्ती हुई मानिनी उज़्ज़वला हूँ !


आंतक से आतंकित नहीं,बल्कि धधकती ज्वाला हूं

घनघोर तिमीर को मात सी देती हुई मैं चंद्रकला हूँ !


ना किसी ऋषि की शापित मैं कोई निरीह अबला हूँ

आदर्श पुरुष की प्रतीक्षा में अहिल्या जैसी शिला हूँ !


पापियों के कर्मों भूल वैतरणी पार कराती निर्मला हूँ

मैं स्वयं कीचड़ में खिली एक पंकज़ा, श्वेत धवला हूँ !


कभी तो बेहद संजीदा तो कभी मैं बेहद चंचला हूँ

सबके समक्ष गर्व से कहती हूँ, हाँ, मैं एक महिला हूँ !


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