Jai Singh(Jai)
Tragedy Action Inspirational
सोना ना काई लगे,खूब तपा लों आग
ऐसे गुण के सूरमा, करें धर्म अरु त्याग
करें धर्म अरु त्याग, भला कर नाम कमाते
परहित करके काम, धरा को स्वर्ग बनाते
देख दीन हालात, तरस कर आता रोना
लोग लगाते दोष, लगे ना काई सोना।
"वंदन नूतन वर...
"ज्ञान के दीप...
पर्व यह ज्योत...
" पटाखे हम न ...
" नमन नमन गु...
"ललई सिंह "
" राखी का त्य...
" भीम ने राखी...
" मेजर ध्यान...
अबला भारत देश...
फिर भी जाने किस लिए नहीं भाती है बेटियां फिर भी जाने किस लिए नहीं भाती है बेटियां
बरसात पर टिकी है तमाम लोगों के सपनों की उड़ान। बरसात पर टिकी है तमाम लोगों के सपनों की उड़ान।
क्योंकि उग आयी झुर्रियां दिल कहता है अब बस ! क्योंकि उग आयी झुर्रियां दिल कहता है अब बस !
एक दिन हुस्न और इश्क में गजब ठन गई उस दिन की वो मुलाकात आखिरी बन गई ! एक दिन हुस्न और इश्क में गजब ठन गई उस दिन की वो मुलाकात आखिरी बन गई !
सुरक्षित रखी थी मैंने शीशे में बंद डायरी सुरक्षित रखी थी मैंने शीशे में बंद डायरी
हो यूँ यादों से ख़ुशियाँ चुराया ना करो…….., हो यूँ यादों से ख़ुशियाँ चुराया ना करो……..,
देश और समाज से गायब हो रही निर्भीकता की परिपाटी। देश और समाज से गायब हो रही निर्भीकता की परिपाटी।
जिस वटवृक्ष की छाँव पायी जिन की उँगली पकड़कर जीवन की राहें बनायीं, जिस वटवृक्ष की छाँव पायी जिन की उँगली पकड़कर जीवन की राहें बनायीं,
रह गई सब तदबीर धरी की धरी, अचानक ही जब छूट गई नौकरी! रह गई सब तदबीर धरी की धरी, अचानक ही जब छूट गई नौकरी!
जिस सच्चाई में जिए आज तक बदकिस्मती से वही झूठी हो जैसे। जिस सच्चाई में जिए आज तक बदकिस्मती से वही झूठी हो जैसे।
ख़ुशी की चुगलियां की, दुःख गले आ लगा, और मैं रो बैठा। ख़ुशी की चुगलियां की, दुःख गले आ लगा, और मैं रो बैठा।
कर ने कर को जाने क्यू जकड़ गया ये दिल ख्यालों में न जाने कहाँ खो गया। कर ने कर को जाने क्यू जकड़ गया ये दिल ख्यालों में न जाने कहाँ खो गया।
कितनी तसल्ली दें, दिल को.. कितनी बातें, बयां कर दें यूँ ही. कितनी तसल्ली दें, दिल को.. कितनी बातें, बयां कर दें यूँ ही.
वीरानियाँ बड़ी हैं, लगे न ज़िस्त-ज़िस्त सा,लगे न जश्न-जश्न सा। वीरानियाँ बड़ी हैं, लगे न ज़िस्त-ज़िस्त सा,लगे न जश्न-जश्न सा।
बंदूक चली जोर से, दरवाजे थे बंद भगदड़ लोगों में मची, साँस बची बस चंद बंदूक चली जोर से, दरवाजे थे बंद भगदड़ लोगों में मची, साँस बची बस चंद
मैं मध्यम वर्गीय हूँ खजूर के पेड़ पर झूले जा रहा हूँ। मैं मध्यम वर्गीय हूँ खजूर के पेड़ पर झूले जा रहा हूँ।
गाँव बेचकर शहर खरीदा चैन की नींद गंवाई है। गाँव बेचकर शहर खरीदा चैन की नींद गंवाई है।
तुझे समझाऊँ भी तो कैसे तू आज भी नादान जो है ज़माने की छोड़ तेरी बात कुछ और है तुझे समझाऊँ भी तो कैसे तू आज भी नादान जो है ज़माने की छोड़ तेरी बात कुछ और...
दिल के अरमानों को तोड़ के तू, क्यूं मुझे बेबस कर गई? दिल के अरमानों को तोड़ के तू, क्यूं मुझे बेबस कर गई?
सुकूं के पल दो पल हमेशा जहाँ हमे भी मिले।। सुकूं के पल दो पल हमेशा जहाँ हमे भी मिले।।