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SUNIL JI GARG

Drama Thriller

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SUNIL JI GARG

Drama Thriller

वैष्णो देवी की यात्रा

वैष्णो देवी की यात्रा

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बेटे ने स्कूल में टॉप किया 

मम्मी की मन्नत हुई पूरी 

वैष्णो देवी जाने की उसकी 

तमन्ना थी जाने कबसे अधूरी 


टिकट कटाया पहुंचे कटरा

लखनऊ से चले हम ट्रेन से 

दशहरे का दिन था बड़ा शुभ

चल दिए भवन को लेन से 


लम्बी चढ़ाई त्रिकूट पर्वत की 

जल्दी ही फूली अपनी साँस 

जय माता दी का नारा लगाया 

बंध गयी तुरंत फिर अपनी आस 


धीरे धीरे चढ़ते गये , 

माता का नाम लेते गये 

अर्ध्कुंवारी तक ही भैया 

लगा कि अब बिलकुल पड़ गए


दर्शन से वहाँ कुछ बंधी हिम्मत 

ज़रूरी था आगे तो चलना 

घोड़ा कर लेने की बात हुई 

पर अपना मन बिलकुल न माना 


चलाचल बढ़े आगे, हौसला रखे 

कुल सात घंटे में भवन पहुँचे

फिर देख के भीड़ और लम्बी लाइन

रह गए हम तो काफी भौंचक्के


बच्चों को लाइन में लगा दिया 

चार घंटे में मिले दर्शन 

माँ के पर दर्शन जैसे ही मिले 

निर्मल हो गया बिलकुल मन 


छक कर प्रसाद वहाँ खाया 

पड़ोसियों के लिए भी ले लिया 

वापसी की उतराई से पहले 

एक धर्मशाला में विश्राम किया 


उसके बाद भैरव काका के 

दर्शन भी ज़रुरी होते हैं 

आपको सब बतलाते हैं 

वहाँ लोग जो सब कोई होते हैं 


भैरव की पहाड़ी भी चढ़े

धीरे धीरे अपने राम 

अब सचमुच लगने लगा 

पूरा हो गया दर्शन का काम 


फिर वापिस कटरा को आये 

करीब करीब लुढ़कते से 

जो कुछ रस्ते में मिला 

उस पर कभी बैठते से 


मुश्किल थी यात्रा शरीर के लिए 

पर मन में बड़ा आया संतोष 

पत्नी का तो दिल भर आया 

बच्चों में भी काफी था जोश 


ऐसी यात्राएं परिवार को 

करनी चाहिए कभी कभी 

सब लोग जब साथ घूमते 

दिल मिल जाते हैं सभी।


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