STORYMIRROR

Kundan Kumar Singh

Fantasy

4  

Kundan Kumar Singh

Fantasy

वाह रे जिंदगी

वाह रे जिंदगी

1 min
285

जाएँ तो जाएँ कहाँ

हर मोड़ पे तन्हाई है

किसी को शिक़वा

किसी को गिला


तो किसी को रुसवाई है

कोई दे रहा वफ़ा का वास्ता तो

कोई कह रहा बेवफ़ा- हरजाई है

कोई बेंच रहा झूठ खुलेआम कोई

कोई कह रहा विश्वाश करों 100% सच्चाई है

अहसास का सिलसिला धीरे धीरे कम हो रहा

कोई कह रहा कुछ नहीं वक़्त की अंगड़ाई है

खाते खाते ठोकरें

 

अब चोट का परवाह नहीं

दर्द को सहता हूँ खुद अकेला हँसके

लोग समझते है इसकी जवानी लौट आयी है

गिरता-उठता संभलता चलता हूँ

उस मंज़िल की ओर

रास्ते हँस के कहते हैं


अभी तो तुम्हारी इम्तेहान की बारी आयी है

थक गया हूँ खुद को साबित करते करते

ना जाने जिंदगी किस मोड़ पे ले आयी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy