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ritesh deo

Romance Tragedy

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ritesh deo

Romance Tragedy

उसी मोड़ पर

उसी मोड़ पर

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हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर..........!!


हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर,

तुमने छोड़ा था जहां, मुँह मोड़ कर 

हमने तो वफा, दिल से किए 

बेवफा तुम ही निकले, दिल तोड़ कर 

हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर


प्यार के फर्ज़ मै तो, निभाता गया 

रूठने पे तेरे, तुझको मनाता गया 

पीछे भागा मै तेरे, सब कुछ छोड़ कर

फिर भी तुमने रुलाया, मुझे तोड़ कर 

हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर


थी जो फर्माइशे तेरी, पूरी करता गया

तुझको पल पल, मै अपना बनाता गया  

दिल मे क्या था तेरे, क्या करता जानकर

धोखे तुमने दिये है, मुझे, गैर मानकर  

हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर


जो साथ चलने का वादा, तुमने किया 

उस डगर को सुगम मै, बनाता गया

चुने है मैंने काँटे, ठोकरे खा कर, 

खिच लिए कदम तुमने, मुझे छोड़ कर 

हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर

तुमने छोड़ा था जहां, मुँह मोड़ कर 


हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर

तुमने छोड़ा था जहां, मुँह मोड़ कर 

हमने तो वफा, दिल से किए 

बेवफा तुम ही निकले, दिल तोड़ कर 

हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर।


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