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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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उफ़्फ ये हाल...

उफ़्फ ये हाल...

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अकल्पनीय सी स्थिति से सब रूबरू हुए

कोरोना के खौफ से हरे सहमे हुए

अपरिचित से थे क्या हो गया

रिश्तों की डोर में फासला आ गया


कैसे मिलें उनसे दूर ही रहो

बस फोन पर दिल की गुफ्तगू करो

अभी तो चढ़ा था प्यार परवान

इस महामारी ने आफत में डाली जान


मासूम बच्चों पर न पूछो क्या गुज़री

खेलने की सारी योजनाएं ठप्प पड़ गई

स्कूल भी तो सारे इस कोरोना ने बंद करा दिए

आॕनलाइन कक्षाओं में कुछ समझ न आए


टीचर दिखाई दे तो नेटवर्क चला जाए

कभी कभी आवाज ही गायब हो जाए

शुक्र है भगवान ने प्रार्थना सबकी सुन ली

जिंदगी दोबारा पटरी को ओर बढ़ रही।


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