Shailaja Bhattad
Abstract Tragedy Inspirational
घुटकर घटने से अच्छा था,
सलवटों को संवार लिया होता।
घुटने टेकने से अच्छा था,
इरादों को संभाल लिया होता।
हर मां में पिता तत्व,
हर पिता में मां तत्व होता है।
जब यह खिलकर आता है,
संतान के लिए जीवन,
खुशनुमा उपहार बन जाता है।
शिव-शिव
सत्संग
श्री राम
सबकी होली
जयश्री राम
ओम नमः शिवाय
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
खुदग़र्ज़ी को ख़ुद से इश्क़ कहना कायरता है अकेलापन नहीं है। खुदग़र्ज़ी को ख़ुद से इश्क़ कहना कायरता है अकेलापन नहीं है।
एहसान जिंदगी तेरा यूँ उतार देंगे, थामकर हिम्मत का दामन उम्र गुजार देंगे। एहसान जिंदगी तेरा यूँ उतार देंगे, थामकर हिम्मत का दामन उम्र गुजार देंगे।
मजबूती से थामे है घर को बेटे का फर्ज़ निभाता है। मजबूती से थामे है घर को बेटे का फर्ज़ निभाता है।
सच को मगर क़लम से तो लिक्खा करे कोई। सच को मगर क़लम से तो लिक्खा करे कोई।
जीवन-मृत्यु पे किसका वश है, उठकर अपना भविष्य संवारे। जीवन-मृत्यु पे किसका वश है, उठकर अपना भविष्य संवारे।
मेरे या तुम्हारे अब अधीन ना हैं औरतें। मेरे या तुम्हारे अब अधीन ना हैं औरतें।
करे देश जिस पर अभिमान ये राजनीति है। करे देश जिस पर अभिमान ये राजनीति है।
मेरी तो शाम भी भूली है मेरी तो रात भी भूली है। मेरी तो शाम भी भूली है मेरी तो रात भी भूली है।
बुढ़ापे में फिर क्यों, आफत अपने सर बुला बैठे। बुढ़ापे में फिर क्यों, आफत अपने सर बुला बैठे।
देखते आये है सदियों से बेबसी में जीते मानव मौन रहकर जीते जो घुट घुट कर जिन्दगी देखते आये है सदियों से बेबसी में जीते मानव मौन रहकर जीते जो घुट घुट...
आखिर मैं तुम्हारी अर्धांगिनी हूँ और तुम मेरे जीवनसाथी। आखिर मैं तुम्हारी अर्धांगिनी हूँ और तुम मेरे जीवनसाथी।
तो लोगों को लगा बूढ़ा सनकी हो गया। तो लोगों को लगा बूढ़ा सनकी हो गया।
पीरी में मिलने-मिलाने की भी तरकीब होती है। पीरी में मिलने-मिलाने की भी तरकीब होती है।
संघर्ष है जीवन का सुन्दर सत्य, यहीं निखारेगा तुम्हारा व्यक्तित्व। संघर्ष है जीवन का सुन्दर सत्य, यहीं निखारेगा तुम्हारा व्यक्तित्व।
उसका स्मरण सब गायब। हैरान हो न आप मेरा ये दोस्त उसका स्मरण सब गायब। हैरान हो न आप मेरा ये दोस्त
अज्ञानी क्रोधी बेचैन लोभी शायद गुणों में कुछ कंस मामा से हैं। अज्ञानी क्रोधी बेचैन लोभी शायद गुणों में कुछ कंस मामा से हैं।
जनता का ये तोड़े विश्वास फिर भी कहे, हम सेवक है खास। जनता का ये तोड़े विश्वास फिर भी कहे, हम सेवक है खास।
रात किये तुम भूल कोई जो, दिन तक न खिल पाये कमल वो, रात किये तुम भूल कोई जो, दिन तक न खिल पाये कमल वो,
पल रहा होता एक तूफान है एक बोझ के तले दब जाते हो पल रहा होता एक तूफान है एक बोझ के तले दब जाते हो
उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई गम। उस पल भी मेरे दोस्त ! न कर कोई गम।