STORYMIRROR

Juhi Khanna Kashyap

Inspirational

3  

Juhi Khanna Kashyap

Inspirational

उम्मीद में बदलता चल

उम्मीद में बदलता चल

1 min
210

पाँवों में बाँध के उम्मीद की झंकार,

जीवन के पथरीले रास्तों पर बढ़ता चल।

कभी तू प्यास से व्याकुल रहेगा,

और मिलेंगी सूखी नदियां। 


तू अपने धैर्य वाली बारिशों से,

उनको भरता चल।

जिसने दिन बनाया है,

उसी ने रात भी।


जिसने हवा बनाई है,

उसी ने आग भी।

हवा लाख बुझा ले,

तेरे हौसलों की आग।


तू अपने हौसलों से ही,

उसे सुलगाता चल।

जैसे अंधेरी रात में भी चंद्रमा, 

रोशन सा रहता है। 


वैसे तू भी हर ना उम्मीदी को,

उम्मीद में बदलता चल।

निराशा हताशा को,

पांवों से ठोकर मार।


कामयाबी खुशी से रोशन,

जीवन को भरता चल।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational