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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

उगता सूरज बहुत कुछ कहता

उगता सूरज बहुत कुछ कहता

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नदिया के उस पार धूमिल होता, 

सूर्य हमसे कुछ कहता है, 

अपने जीवन में यूँ ठहरकर, 

क्या चिर समाधि वो ले लेता है, 

नियति का विधान, 

किसी के बदलने से नहीं बदलता कभी, 

पर उगता वो सूरज, 

हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा जरूर देता है, 


सुख और दुख जीवन का हिस्सा, 

ये तो आते- जाते रहते हैं, 

कुछ लोग देते दगा, 

गिरगिट कि तरह रंग वो अपने बदलते हैं, 

दुनिया के इस रंगमंच पर, 

जिसने भी अभिनय सीख लिया, 

मंजिल पर खड़ी बाधाओं से लड़कर,

वो दुनिया के संग चलते हैं, 


इस पथ के मुसाफिर तू, 

यहाँ दर्द-ए-ग़मों से परेशान क्यों है, 

आखिर ये रात अंधेरी देखकर ,

तू जाने इतना हैरान क्यों है, 

कितनी भी व्यस्त भरी हो ये जिंदगी ,

समय मिल ही जाता है, 

माना घनघोर अंधेरा है, 

पर इसे देख तू इतना परेशान क्यों है, 


मंजिल उसी को मिलती ,

जिसने अपने आपको पहचान लिया, 

कर्तव्य से अपने अडिग रहा,

जिसने आगे बढ़ना ठान लिया, 

आगे बढ़ पथ पर अपने, 

परिणाम सोचकर कभी मत पीछे मुड़ना तू, 

जाग उठा जिसका जुनून, 

उसने कठोर पर्वत को भी चीर लिया I


सूरज चमकता पूरे जोश से, 

पूरी सृष्टि मुस्कुरती है, 

पवन चले तो सरिता की लहरें भी,

अठखेलियाँ खाती है, 

कठिनाइयों को देखकर ,

मत हो हताश जीवन में तू, 

क्योंकि घने अंधेरे को चीरकर, 

एक नई रोशनी ज़िन्दगी में जगमगाती हैI


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