उफ़... क्या क्या कर लेते हो
उफ़... क्या क्या कर लेते हो
बहुत सोचा पर समझ नहीं आई एक बात कसम से ;
तुम मुझ मासूम से इतनी बेवफाई कैसे कर लेते हो !
तुम्हारा जब दिल भर जाए तुम साथी बदल लेते हो ;
बिछड़ जाने के डर से तुरंत नया यार बदल लेते हो !
न जाने क्यूँ और कैसे हुआ ये इश्क तुमको हमसे ;
और अब तोड़कर सारे कस्मे वादे निकल लेते हो !
कहीं तुम्हारा ये दिल कोई गहरा समंदर तो नहीं ;
कि जिसको चाहा उसे अपने अंदर निगल लेते हो !
माना कि,महबूब बदलना रिवायत है सियासत में ;
तुम भी चिकना चेहरा भरी जेब देख फिसल लेते हो !
किसी का नाम बदनाम हो जाए क्या फर्क पड़ता है ;
तुम्हें अपनी चलानी है, क्यों बिना बात दखल देते हो !
आए थे मेरी ज़िन्दगी में मोहब्बत के मसीहा बनकर ;
जो इश्क निभाना आता नहीं,तो गैरों की नकल लेते हो।

