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V. Aaradhyaa

Romance

4  

V. Aaradhyaa

Romance

उफ़... क्या क्या कर लेते हो

उफ़... क्या क्या कर लेते हो

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बहुत सोचा पर समझ नहीं आई एक बात कसम से ;

तुम मुझ मासूम से इतनी बेवफाई कैसे कर लेते हो !


तुम्हारा जब दिल भर जाए तुम साथी बदल लेते हो ;

बिछड़ जाने के डर से तुरंत नया यार बदल लेते हो !


न जाने क्यूँ और कैसे हुआ ये इश्क तुमको हमसे ;

और अब तोड़कर सारे कस्मे वादे निकल लेते हो !


कहीं तुम्हारा ये दिल कोई गहरा समंदर तो नहीं ;

कि जिसको चाहा उसे अपने अंदर निगल लेते हो !


माना कि,महबूब बदलना रिवायत है सियासत में ;

तुम भी चिकना चेहरा भरी जेब देख फिसल लेते हो !


किसी का नाम बदनाम हो जाए क्या फर्क पड़ता है ;

तुम्हें अपनी चलानी है, क्यों बिना बात दखल देते हो !


आए थे मेरी ज़िन्दगी में मोहब्बत के मसीहा बनकर ;

जो इश्क निभाना आता नहीं,तो गैरों की नकल लेते हो।


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