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Rahul Kumar

Romance Others

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Rahul Kumar

Romance Others

Udas Dil poem by Rahul kumar

Udas Dil poem by Rahul kumar

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घर से दूर एक छोटा सा कमरा है मेरा, बाहर बहुत शोर है मगर दिल उदास है मेरा,

कहने को हज़ार बातें है, मगर खाली खाली सा अधूरा किताब पड़ा है मेरा,

मतलब की बातें करते हैं लोग यहाँ, कोई थोड़ा सा भी अपनापन दिखाये तो आखे भर आये मेरा,

अच्छी खासी जिंदगी थी कभी मेरी, मगर लगता है अब अँधेरा सा हो गया है जीवन मेरा,

ना खाने-पीने का कोई ठिकाना है, ना हसने -हसाने वाला कोई याराना है मेरा,

घर की ज़िम्मेदारी ने समझदार कर दिया मुझे, वरना कभी घर के छोटे आंगन में हँसते-खेलते दिल खुश रहता था मेरा,

घर से दूर एक छोटा सा कमरा है मेरा, बाहर बहुत शोर है मगर दिल उदास है मेरा.!!

कवि - राहुल कुमार


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