STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

3  

Surendra kumar singh

Abstract

उदासी कांप रही है

उदासी कांप रही है

1 min
12K

उदासी कांप रही है

एक सकारात्मक सोच की आहट से

और कुछ लोग अस्त्र शस्त्र लिए

युद्ध लड़ रहे हैं

सकारात्मक सोच की आहट से

उसके आगमन को रोकने के लिए।

ये जो सकारात्मक सोच है

बिखरी बिखरी सी दिखती हुई भी

बिखरी नहीं है

उसे खोलें तो आपस का प्यार है

और कानून का राज है

इतनी भर है ये सकारात्मकता और

इतना भर है उसका विस्तार।


यकीनन अगर आप गुलाम नहीं हैं

विचारों के तो

ये सोच आप की है।

सभी प्रेम चाहते हैं

सभी कानून का राज चाहते हैं

विश्वास नहीं होता

कभी हुआ भी नहीं कि

इस सकारात्मक सोच जिसकी

आहट को रोकने के लिए

कुछ युद्ध के उन्मादी हो गये हैं

रोक सकेंगे इस

सकारात्मक सोच को,

जो हर एक इंसान की है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract