तुमसे अब मै क्या कहूँ
तुमसे अब मै क्या कहूँ
तुमसे अब क्या मैं कहूँ हर बात तो हम लिख देते है,
मेरे हर सवाल का जवाब तुम लिख नही सकते ये जानते है हम,
तेरी खामोशियाँ कभी कभी चुभती है हमको पर,
तुझसे अब हमको कोई गिला या शिकायत नही,
वक्त पर छोड़ दिया हर फैसला हमने अपनी किस्मत का,
वक्त कब बदलेगा ये तो ईश्वर और तुम ही जानो,
तेरे वादों पर करके भरोसा जिंदगी क्या से क्या हो गयी,
लिखने का हुनर ऐसा जागा की शायर बन कर रह गया,
दर्द लिखते लिखते हम अपना हर दर्द भूल गए,
अब तो हमको याद भी नही आती तेरी शायरी करते करते,
भूल ही ना जाये तुझको सदा के लिए इस कलम के चक्कर में,
जो भी फैसला लेना है ले लो और फासले मिटा लो सदा के लिए।
