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Bhawna Kukreti Pandey

Romance

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Bhawna Kukreti Pandey

Romance

तुम्हारी उदासी

तुम्हारी उदासी

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प्रिय तुम जब 

उदास होते हो, 

मेरे कविता के छंद खो जाते है!

निर्वात कलम में उतर आता है

अक्षर शून्य में वापस

लौट जाते है।


हो जाता है 

व्यथित, असहाय मन

तुम्हारी पीड़ा न बांट पाने पर,

रह जाता है प्रेम

अलिखित कोरे कागज पर।


बिन शब्द कहो

क्या है तुम संग संभव मुझे?! 

फिर भी भावना से,

अंक लू क्या प्रिय तुम्हें?!



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