तुम दहेज साथ लाना
तुम दहेज साथ लाना
तुम विदाई संग,
अपने बचपन को ...
साथ ले आना,
वो गुड़िया संग ...
जो की थी बातें,
वो चंचलता की,
अंगड़ाई....
आकर मेरी आंखों में,
बसा जाना !
वो तुम्हारा,
स्कूल का पहला दिन ...
वो तुम्हारा हार जाना,
वो जीत के लिए जागना ...
तुम वो सुनहरा खजाना,
मेरे दिल की तिजोरी को ...
हर उस मंजर से भर जाना !
वो रूठने की अल्हड़ता,
वो मान जाने की समझदारी ...
वो पहली तुम्हारी बनी,
टेडी रोटी ..
वो जली हुई सब्जी के स्वाद से,
तुम हमारे घर की ...
अन्नपूर्णा बन जाना !
वो जिद्द की कविता,
वो नादानी की कहानियां ....
वो तुम्हारे सपनों की गजल,
तुम अपने,
हर सांस की नज्म को ...
मेरी सांसो में उतार जाना !
सरस्वती बनकर
मेरे आंगन की,
लक्ष्मी तुम बन जाना ....
पुजना तुम तुलसी को,
मेरे आंगन की मिट्टी,
तुम बन जाना !
