STORYMIRROR

आनंद कुमार

Romance

4  

आनंद कुमार

Romance

तुम भाग -2

तुम भाग -2

1 min
227

तुम्हारा रंग उतरा ही कहां था,

जो किसी और का रंग मैं चढाता।


जिंदगी गुज़र गई तेरे इश्क में,

मैं अब किसको अपना इश्क बनाता ?


तुम छोड़ गई मुझे इस दुनिया में अकेला,

ये मैं किसको और क्यों बताता ?


तुम ही थे मेरा प्यार,

इस बात को, मैं कब तक झुठलाता ?


तुम नहीं हो, एक कसक सी है दिल में,

इस कसक को मैं, किस-किस से छुपाता ?


मिल जाओ काश! किसी राह पर यूं ही,

इसलिए मैं हर राह से यूं ही गुजर जाता।


तुम बेवफा थी, ये इल्म था मुझे,

मगर इस इल्म को तुमको कैसे जताता ?


इंतजार में तेरे आज भी ये जिंदगी,

इस इंतजार को मैं और क्या बताता ?


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance