तुम भाग -2
तुम भाग -2
तुम्हारा रंग उतरा ही कहां था,
जो किसी और का रंग मैं चढाता।
जिंदगी गुज़र गई तेरे इश्क में,
मैं अब किसको अपना इश्क बनाता ?
तुम छोड़ गई मुझे इस दुनिया में अकेला,
ये मैं किसको और क्यों बताता ?
तुम ही थे मेरा प्यार,
इस बात को, मैं कब तक झुठलाता ?
तुम नहीं हो, एक कसक सी है दिल में,
इस कसक को मैं, किस-किस से छुपाता ?
मिल जाओ काश! किसी राह पर यूं ही,
इसलिए मैं हर राह से यूं ही गुजर जाता।
तुम बेवफा थी, ये इल्म था मुझे,
मगर इस इल्म को तुमको कैसे जताता ?
इंतजार में तेरे आज भी ये जिंदगी,
इस इंतजार को मैं और क्या बताता ?

