Mayank Kumar
Classics
थोड़ा सही तूझे पढ़ा तो
अनगिनत जकड़न सहा तो।
पूरी उम्मीद है कुछ करूंगा
इश्क में बाधाएं हैं।
पर इसे भी पार करूंगा !
तुम एक कलम सी...
उस चाँद का भी...
कुछ खिला चंदा...
पहरेदार
आधी रोटी
मैं भीग रहा ह...
तू कहीं खो गय...
कुछ बातों को ...
मैं तेरे लिए ...
मेरे अंदर वह ...
मां और बाबा एक आधार हैं हमारे। मां और बाबा एक आधार हैं हमारे।
तेरहवीं सदी में बनाई गई, ईंटों से निर्मित की गई। तेरहवीं सदी में बनाई गई, ईंटों से निर्मित की गई।
ग़रीब , पिछड़ा, दलितों का मर्म को भेद कर अपनी सत्ता को हासिल करता राजनेता….. l ग़रीब , पिछड़ा, दलितों का मर्म को भेद कर अपनी सत्ता को हासिल करता राजनेता….. l
रग-रग में बिजली दौड़ जाए मैं ओ चिंगारी भरने आया हूँ। रग-रग में बिजली दौड़ जाए मैं ओ चिंगारी भरने आया हूँ।
जो छुपते हैं पर्दे की आड़ में ऐसे डरपोक की वही सजा है।। जो छुपते हैं पर्दे की आड़ में ऐसे डरपोक की वही सजा है।।
अच्छा बुरा हर सफर प्यारा अपने गम में भी। अच्छा बुरा हर सफर प्यारा अपने गम में भी।
सीढियां चढ़नी यहाँ सबको ही है मगर पहुँच रहा शीर्ष वही जिसके पैर और हैं। सीढियां चढ़नी यहाँ सबको ही है मगर पहुँच रहा शीर्ष वही जिसके पैर और हैं।
उनको शमन करो दमन करो मैं ऐसा तुम्हे बताने आया हूँ। उनको शमन करो दमन करो मैं ऐसा तुम्हे बताने आया हूँ।
निस्वार्थ प्रेम का पाठ पढ़ाते सूरजमुखी के फूल बड़े प्यारे। निस्वार्थ प्रेम का पाठ पढ़ाते सूरजमुखी के फूल बड़े प्यारे।
ना कुछ छिपाना और दिल मे जो आए बताना था। ना कुछ छिपाना और दिल मे जो आए बताना था।
वापस गिरकर बार-बार लगातार चलना है, बस आज मुझे शायर बनाना है... वापस गिरकर बार-बार लगातार चलना है, बस आज मुझे शायर बनाना है...
स्मृतियों के मंदिर विरह की आरती मन निर्भय न शांत बस अपना ही दुख। स्मृतियों के मंदिर विरह की आरती मन निर्भय न शांत बस अपना ही दुख।
बहुत उदास है आज ये मन पैर पसार रहा खालीपन। बहुत उदास है आज ये मन पैर पसार रहा खालीपन।
पर समझता वही है जिसने, खुद चोट खाया है।। यकीनन मुश्किल है बहुत। पर समझता वही है जिसने, खुद चोट खाया है।। यकीनन मुश्किल है बहुत।
खेलो रे खेलो रे बजाके ढ़ोल। खेलो रे खेलो रे बजाके ढ़ोल।
फैली है चारो तरफ, जन जन में जो दूरी आपसी ईर्ष्या द्वेष, तू ही जरा कम कर दे। फैली है चारो तरफ, जन जन में जो दूरी आपसी ईर्ष्या द्वेष, तू ही जरा कम कर दे।
क्या बच्चा क्या बूढ़ा "लक्ष्य" क्या आदमी क्या जनाना है। क्या बच्चा क्या बूढ़ा "लक्ष्य" क्या आदमी क्या जनाना है।
लिख दे तु मेरा हमसफ़र उन्हें ख़ुदा तो जिंद़गी बदल जाएं। लिख दे तु मेरा हमसफ़र उन्हें ख़ुदा तो जिंद़गी बदल जाएं।
जो व्यवसायिक जीवन में मेरे काम आते हैं। जो व्यवसायिक जीवन में मेरे काम आते हैं।
जैविक खेती से नाता जोड़कर जीवन को समृद्धि की ओर मुख मोड़े।। जैविक खेती से नाता जोड़कर जीवन को समृद्धि की ओर मुख मोड़े।।