तुझे देख मन मेरा मदहोश हुआ
तुझे देख मन मेरा मदहोश हुआ
तुझे देख मन मेरा मदहोश हुआ
लफ्ज़ ठैर गए और मैं खामोश हुआ
अमृत समझा तेरे अश्कों को आशिकों ने
खैर मैंने पि लिया तो मैं बेहोश हुआ
चल तू मेरी रकीब मैं तेरा तोश हुआ
सोचा ला के दिल्लगी तुझसे से निर्दोष हुआ
मुझे मिली ये सज़ा तुझसे इश्क फरमाने कि
तुझसे लाई मोहब्बत का अफ़सोस हुआ
शायद मैं ही पागल था ना मुझे होश हुआ
तेरी इश्क ऐ चालाकी में संतोष हुआ
मृषा तेरी दिल्लगी का सलीका था तुझको
तेरी अदाओं से आवारा फरामोश हुआ
