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Hitesh Awara ji

Others

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Hitesh Awara ji

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मालूम पड़ता है

मालूम पड़ता है

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देर रात ख्वाबों में फरिश्तों का

पैगाम मालूम पड़ता है ।।


दस्तक ए मौत जिंदगी मेंं बनकर

गुमनाम मालूम पड़ता है ।।


कैसी हिदायत है यह कैसा

ईनाम मालूम पड़ता है ।।


मचल गया फिर मन मेरा जो

गुलाम मालूम पड़ता है ।।


क्या कसूर मेरा तेरी नजरो में

सरेआम मालूम पड़ता है ।।


रंगीला सफर बड़ा ही सुहाना था तेरा

आवारा के बाद तू बदनाम मालूम पड़ता है ।।



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