STORYMIRROR

Akash Yadav

Tragedy

3  

Akash Yadav

Tragedy

टूटा आशिक़

टूटा आशिक़

1 min
399

आज एक टूटा हुआ आशिक़

एक बात पूछना चाहता है,

क्यों इश्क़ के बीच हमेशा

ये समाज़, धर्म ये जमाना आता है?


जो अपने इश्क़ की खातिर

भगवान के सामने हार नहीं मानता,

वो अंत में लड़ते लड़ते आख़िर

उसके कुछ बन्दों से हार जाता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy