STORYMIRROR

Dr Narendra Kumar Patel

Abstract

3  

Dr Narendra Kumar Patel

Abstract

तस्वीरें

तस्वीरें

1 min
257

तस्वीरें कितनी बना दी हमने

अपनी ही किताबों में

वह तस्वीर बनाऊं कैसे

आती है जो ख्वाबों में।

बना तो मैं वह भी सकता हूं

पर डरता है मेरा मन

कहीं खो ना जाए वो

मेरे ही किताबों में।

तस्वीरों की बात चले

तो बन जाती है आंखों में

फिर भी जाने ढूंढू क्यों

उसको मैं किताबों में ।

फूलों जैसी ना झुकता है

हिरनी जैसी आंखें हैं

वह तस्वीर बनाऊं कैसे

आती है जो ख़्वाबों में।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract