STORYMIRROR

Jayantee Khare

Abstract

3  

Jayantee Khare

Abstract

तरसोगे नारी जाति को

तरसोगे नारी जाति को

1 min
230

कहने को नारी की पूजा

होती है इस देश में

लेकिन कितने दानव बैठे

हैं मानव के वेश में


मौत डोलती पल पल सर पे

मुश्क़िल है बेटी का जीना

कौन जानता क्या हो जाये

मिल जाये कब कोई कमीना


महफ़ूज़ नहीं घर बाहर

वहशी हैं दरिंदे सब

पैदा ही न हो पाए

मारे पेट में जब


कौन बचा पाए बेटी को

पेट के अंदर या बाहर हो

दूर नहीं वो दिन जब तुम सब

तरसोगे नारी जाति को।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract