त्रिशूलधारी शिवशंकर
त्रिशूलधारी शिवशंकर
मेरे शिवशंकर मेरे भोलेनाथ :
रखना कृपा मुझ पर दीनानाथ !
महेश हो तुम अंतर्यामी :
मानिनी पार्वती के तुम स्वामी !
कर में त्रिशूल कंठ में नाग बांधे :
गंगा जटा में चन्द्र संग सिराज़े !
त्रिलोचन में अद्भुत शक्ति विलक्षण :
हाथ में इनके डमरू सदा बाजै !
भक्तन सब शिव के गुण गावैँ :
गौरा जी नित्यप्रति ध्यान लगावैं !
धतूरा भंग शिव को अति प्रिय है :
अंग अंग में भस्म लगाए लिय है !
सर्वव्यापी नटराज़ पालनहारा :
शिवरात्रि मनाए भक्ति से जग सारा!
