STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Inspirational

4  

V. Aaradhyaa

Inspirational

त्रिशूलधारी शिवशंकर

त्रिशूलधारी शिवशंकर

1 min
409


मेरे शिवशंकर मेरे भोलेनाथ :

   रखना कृपा मुझ पर दीनानाथ !


महेश हो तुम अंतर्यामी :

    मानिनी पार्वती के तुम स्वामी !


कर में त्रिशूल कंठ में नाग बांधे :

    गंगा जटा में चन्द्र संग सिराज़े !


त्रिलोचन में अद्भुत शक्ति विलक्षण :

    हाथ में इनके डमरू सदा बाजै !


भक्तन सब शिव के गुण गावैँ :

    गौरा जी नित्यप्रति ध्यान लगावैं !


धतूरा भंग शिव को अति प्रिय है :

    अंग अंग में भस्म लगाए लिय है !


सर्वव्यापी नटराज़ पालनहारा :

   शिवरात्रि मनाए भक्ति से जग सारा!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational