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Sonam Kewat

Abstract

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Sonam Kewat

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तो तुम गलत हो

तो तुम गलत हो

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मैंने अपने सपनों को कुर्बान किया है 

कुछ अपनों को खुश पाने के लिए 

सब की खुशी में अपनी खुशी को ढूंढा 

सिर्फ अपने गमों को छिपाने के लिए 

अगर तुम्हें लगता है कि 

सिर्फ कुर्बानी मुझे ही देनी चाहिए तो 

तुम गलत हो !


मेरी जिंदगी का हर रास्ता अब तक

मेरे लिए बाकी लोगों ने बनाया 

हां यह सच है कि मुझे चलना भी 

उन्हीं लोगों ने ही सिखाया पर 

अगर तुम्हें लगता है कि मेरे हर कदम 

लोगों के हिसाब से होने चाहिए तो 

तुम गलत हो !


मैंने जीवन साथी भी चुना था तो

उन्हीं लोगों के मन से चुना था

मुझे वो सही नहीं लगा था पर 

मैंने दिल की बात कहां सुना था

अगर तुम्हें अब भी लगता है कि 

जीवनसाथी नसीब में होना चाहिए तो 

तुम गलत हो !


अब अपने जिंदगी के हर फैसले 

मैं खुद ब खुद करूंगी 

अगर गलत भी हुआ फैसला तो 

मैं अकेले ही लडूंगी 

अगर तुम्हें लगता है कि 

मैं हाथ से निकल गई हूं तो 

तुम गलत हो!


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