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Vimla Jain

Action Inspirational

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Vimla Jain

Action Inspirational

तकनीक बिना की सीधी सरल दुनिया

तकनीक बिना की सीधी सरल दुनिया

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तकनीक के बिना की दुनिया


हमने एक जमाना देखा है,

तकनीक के बिना की दुनिया को जिया है।

जहाँ न मोबाइल की घंटी, न स्क्रीन का शोर,

बस शांति की लहरें और जीवन में ठहराव का जोर।


रेडियो पर गाने, संग झूमने की बहार,

दोस्तों संग गाते-नाचते, खुशियों की बौछार।


मजाक-मस्ती, खाना-पीना,

रहना, झगड़ा, टंटा और फसाद,

सब कुछ घर के आँगन में ही,

मस्ती का माहौल था बहुत ही खास।


खुले आकाश तले मस्ती की तान,

मिट्टी में खेलना, घरौंदा निर्माण।

फिर जोर-जोर से हँसना,

किसका घर सुंदर बना, किसका ढह गया,

इन्हीं खेलों में बचपन सहेज गया।


बच्चों के खेल-खेल में किताबें पढ़ना,

पढ़ाई का महत्व समझाना,

रिश्तों की जिम्मेदारी निभाना,

हर जीवन शांत और प्यार से भरा था।


मुश्किलें तब भी थीं, खबरें पहुँचाने में,

फोन से संपर्क करने में।

फिर भी जीवन शांति से भरा था,

बच्चे-बूढ़े सब आपस में संवाद करते थे,

तकनीक के गुलाम नहीं थे।


कुछ लिखना हो, कुछ पढ़ना हो,

तो दिमाग से सोचना पड़ता था,

ना कि एक बटन दबाते ही

सब जवाब मिल जाता था।


पेड़ों की छाँव तले हमने खेला,

अमरूद की डाल पर बैठ पढ़ाई का मेला।

नीम के नीचे कंचे खेले,

गुल्ली-डंडा और सितोलिया की बहार थी।


आज के बच्चे ये खेल नहीं जानते,

आउटडोर गेम्स का आनंद नहीं लेते।

तकनीक ने उन्हें

वीडियो गेम में बाँध दिया है,

उनकी दुनिया फैंटेसी और स्क्रीन में सिमट गई है।


तकनीक एक आशीर्वाद सही,

पर बिन इसके जीवन था सुखद और निखरा हुआ।

हम तकनीकी युग के खिलाफ नहीं हैं,

इसने हमें बहुत कुछ सिखाया है,

दुनिया को करीब लाया है।


मगर रिश्तों में भौतिकता घुल गई है,

कभी-कभी बेकार की वीडियो और सर्फिंग में

हम अपना समय गँवा देते हैं।


तकनीक ने हमें जोड़ा है,

देश-विदेश की दूरी मिटाई है।

वीडियो कॉलिंग से हमेशा संपर्क में रहते हैं,

यह एक आशीर्वाद भी है।


मगर इसका गुलाम होना,

दिमाग का उपयोग कम करना,

हमारी मानसिक शांति को छीन लेता है।


तकनीक के बिना का जीवन भी सुंदर था,

शांतिपूर्ण और सुकून से भरा।

दोनों ही जीवन अच्छे हैं,

अपने-अपने फायदे और नुकसान के साथ।


अगर भौतिकता को थोड़ा कम करें,

रिश्तों में गर्माहट बढ़ाएँ,

तकनीक का सीमित उपयोग करें,

और दिल-दिमाग का सही इस्तेमाल करें,

तो यह तकनीकी युग भी बेहतर बन सकता है।


तकनीक ने हमें जोड़ा है,

सोचने का एक नया नजरिया दिया है।

शांति है अब भी, पर मोबाइल कानों में चिपके,

मन का ठहराव कहीं राहें भटके।


हमें चाहिए वो ठहराव और शांति की लहर,

जहाँ दिल से संवाद हो और सुकून का सफर


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