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SNEHA NALAWADE

Tragedy

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SNEHA NALAWADE

Tragedy

तीसवां दिन

तीसवां दिन

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प्रिय डायरी,

तीसवां दिन तींसवा दिन

किसी भी कवी के लिए

सबसे बड़ी सजा तब मिलती है


जब उसकी कविता को

कोई कॉपी करता है

आखिर ऐसा क्यूँ और करके

ऐसा क्या अर्थ निकलता है


जिस इंसान पर मैंने कविता लिखी

आज वो ही इंसान का

मुझे फोन आता है कहती है कि

कविता हूबहू किसी और लिखी है

पढ़ी है मैंने क्या कहती मैं कैसे कह पाती


हाँ ! मुझे पता है इसके बारे में

जाँच चल रही है एक पल के लिए

मैं भावुक हो गई और होती भी क्यूँ नहीं

जिस इंसान पर मैं जान छिड़कती हूँ

जिनके शब्द के बाहर मैं नहीं हूं


आज जब ऐसा कुछ उन्होंने बताया

जो मुझे पहले से ही पता था

पर जल्द ही सब ठीक हो जाए

बस इतनी ही इच्छा है किसी भी

वजह से मेरे और उनके रिश्ते में


दरार न आए वो मुझसे

सहन नहीं हो पाएगा

मैं तो जीते जी मर जाऊँगी

मर जाऊँगी मैं....।


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