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SNEHA NALAWADE

Abstract

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SNEHA NALAWADE

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बचपन...

बचपन...

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वो भी क्या वक्त था जब हम खेल कूद करते थे

मस्ती होती शरारतें होतीं हरकतें होती 

पर इन सब के पीछे छुपी मासूमियत होती 

जिसे पैसे के तराज़ू में तोला नहीं जा सकता 

आज कल के बच्चे अपना बचपन जीना भूल गए हैं 

पूरा वक्त सिर्फ मोबाइल या टीवी बस इसके अलावा और कुछ नहीं 

परंतु इसके चलते होने वाले नुकसान का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता 

वक्त रहते बडे लोगो को इन सारी चीजों पर ध्यान देना चाहिए 

वरना आगे चलकर काफी परेशानियों का सामना करना पड सकता है 

अंत में दुनिया मां और पिता को ही दोषी मानती है 

वक्त रहते हर चिज पर लगाम लगाना आवश्यक है 

आशा करती हूं की आप सब इस बात को समझेगे...! 


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