STORYMIRROR

SNEHA NALAWADE

Abstract

2  

SNEHA NALAWADE

Abstract

वो पल...

वो पल...

1 min
125

वो भी क्या पल थे जब हम बातें किया करते थे 

एक दूसरे से मिलना बातें करना ज्यादा तर 

तो सब कुछ नजरों से ही होता था परंतु 

अभी इस माहमारी की वजह से बाते सिर्फ मोबाइल पर ही होती है 

सामने बैठकर बाते कब होगी भगवान ही जाने 

पर हमे खुद पर और भगवान पर विश्वास रखना होगा

आज नहीं तो कल सब कुछ ठीकक हो जाएगा 

जल्दी ही वो जानती सारे पल वापस आयेंगे...!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract