STORYMIRROR

Pinky Dubey

Abstract

3  

Pinky Dubey

Abstract

था एक पंछी

था एक पंछी

1 min
508

था एक पंछी पिंजरे में बंद

थे उसके अनेक सपने 

पंख फेलाना चाहता था

जीना चाहता था


जब भी उड़ने की कोशिश करता

उसके पंख काट दिए जाते 

जी राहा था बस 

मगर उम्मीद नही छोड़ी थी


ऊड़ना था उसे

तड़पता रोता गाता​ 

पर कुछ नही कर पाता​ 

फिर चुप हो जाता

बस उम्मीद थी की कब कोई

उसके पिंजरे का दरवाजा खोले

और वो ऊड़ जाए खुले आसमानो की और


पंख फेलाना चाहता था

जीना चाहता था

ऊड़ना चाहता था

ज़िन्दगी मे ऐसा मोड़ आया कि

पिंजरा खुला और वो

उड़ गया अपनी मंज़िल की और।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract