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Ervivek kumar Maurya

Abstract Romance

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Ervivek kumar Maurya

Abstract Romance

तेरी मांग भर दूँगा

तेरी मांग भर दूँगा

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कितनी मोहब्बत तुम मुझे करते हो सनम

कैसे मेरे बिना तुम रहते हो सनम

अभी पास आने में कुछ वक्त है

क्या तुम मेरा इंतज़ार करते हो सनम


बस कुछ देर का मिलन तय है

तेरे जिस्म से मेरा जिस्म सुंगन्धमय है

अब रोको न आओ मेरे पास जानम

बहुत प्यार करते हैं तुझको सनम


अभी रुक जाओ थोड़ा इंतज़ार तो करो

मेरे दिल को और मुझे कुछ समझो

बंधी हूँ जग की निगाहों से

ये मत सोचों तुझ संग धोखा करते हैं सनम


ये जानता हूँ घिरी होगी बवालों से

घर के ,बाहर वालों के सवालों से

मैं कहता हूँ सारी रश्में, कसमें तोड़ के आ जा

तेरी मांग भर दूँगा अपने लहू से सनम।


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