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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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तेरी हंसी

तेरी हंसी

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हंसी बेवजह तेरी

बेकार नहीं होती

किसी वजह की भी

मोहताज नहीं होती


बांट सुकून सब में रहबर

ग़म में भी हर किसी के

ख़ुशी का ताज ये होती


हंसी बेवजह ये तेरी 

लाजवाब ही होती

हर गमों में खुशियों की 

ये मोहताज नहीं होती।


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