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Chhavi Srivastava

Abstract

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Chhavi Srivastava

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स्वतंत्रता

स्वतंत्रता

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क्या ऐसी आज़ादी का देखा था हम सब ने सपना,

जिसमें नहीं है कोई अपना।


नहीं किसी को है अपनी आज़ादी पर गर्व यहाँ,

नहीं कोई समझता एक दूसरे का दर्द यहाँ।


बलि की वेदी पे जहाँ जान गवाईं देश के वीरों ने,

तभी आज स्वतंत्र धरती पाई हमने।


पहचानो इस स्वतंत्रता के मूल्यों को प्यारों,

न बेचों इसे दुबारा गोरो को प्यारों।


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