नीलम पारीक
Drama
काश !
नौकरी में
तनख्वाह के साथ,
मिलते
कुछ सुनहरे पल
तो चुपके से
चुरा लेती
पति के बटुए से
और रखती
छुपा-छुपाकर
फ़िर करते खर्च
हम दोनों
साथ-साथ
जीते उन स्वर्णिम पलों को,
जब-जब होता मन
उदास या निराश
"कल्पना" (fan...
"प्रेम"
"बचपन की ओर"
"ज़िन्दगी-इक ख...
"पैसा"
"सफ़र ज़िन्दगी ...
"जादू"
"खौफ़नाक मंज़र"
"मेरे हीरो"
मेरा परिवार
जालीम है वो मोहब्बत सिर्फ दर्द ही देती है।। जालीम है वो मोहब्बत सिर्फ दर्द ही देती है।।
तेरी मस्त अदा से मेरी इश्क की प्यास बढ़ जाती है, तेरी मस्त अदा से मेरी इश्क की प्यास बढ़ जाती है,
सत्य को सजग “कलम” दी, संविधान के “शब्दों” में, सत्य को सजग “कलम” दी, संविधान के “शब्दों” में,
आज का दिन है कुछ खास आज का दिन है कुछ खास
यह मधुशाला बस नाम ही काफी, जो आया, वो लौट न जाएगा। यह मधुशाला बस नाम ही काफी, जो आया, वो लौट न जाएगा।
इस महोत्सव का शुभारंभ हुआ था, इस महोत्सव का शुभारंभ हुआ था,
पिछले दरवाजे से होकर भाग जाती है.. पिछले दरवाजे से होकर भाग जाती है..
चाहती हूं मैं तुझको दिल से, मन मीत मेरे तू आजा। चाहती हूं मैं तुझको दिल से, मन मीत मेरे तू आजा।
भले रख न पाये रोजा, सज्जाद मन का रोजा जरूर रखे, याद भले रख न पाये रोजा, सज्जाद मन का रोजा जरूर रखे, याद
जो सच्चे दिल से न हो, प्रार्थना नहीं होती...! जो सच्चे दिल से न हो, प्रार्थना नहीं होती...!
जब भी चाहे तब महसूस कर लो जानेमन, हम आप के रोम रोम में ही लहराते रहते हैं। जब भी चाहे तब महसूस कर लो जानेमन, हम आप के रोम रोम में ही लहराते रहते हैं।
भले ही तू बार बार मुझ से रुठा करें, तुझे मनाने का मुझ को सुकून मिलता है। भले ही तू बार बार मुझ से रुठा करें, तुझे मनाने का मुझ को सुकून मिलता है।
तेरे मधुर अल्फाज़ मुझ को रोमांचित कर देता हैं, तेरे मधुर अल्फाज़ मुझ को रोमांचित कर देता हैं,
सांसो की सरगम तुम सुन लो मुझसे, इश्क का सूर तुम मिलाया करो , सांसो की सरगम तुम सुन लो मुझसे, इश्क का सूर तुम मिलाया करो ,
अपने ही घर में, हैं हम अजनबी, आईना भी पूछे के, तू कौन है ? अपने ही घर में, हैं हम अजनबी, आईना भी पूछे के, तू कौन है ?
हम उसे देखकर सावन की घटा महसूस करते है। हम उसे देखकर सावन की घटा महसूस करते है।
ये प्यास अब जाती नहीं कोई बूँद भी आती नहीं। ये प्यास अब जाती नहीं कोई बूँद भी आती नहीं।
बेशक़ आपको ये एहसास तो होता होगा कि इस नसीब की बातों का कोई ठौर-ठिकाना नहीं... बेशक़ आपको ये एहसास तो होता होगा कि इस नसीब की बातों का कोई ठौर-ठिकाना ...
कुछ बात तो है…जो बेवज़ह नहीं है कुछ बात तो है…जो बेवज़ह नहीं है
मैं श्याम बादल बनूँ, तू चमकती दामिनी बन जाना, मैं श्याम बादल बनूँ, तू चमकती दामिनी बन जाना,