नीलम पारीक
Drama
काश !
नौकरी में
तनख्वाह के साथ,
मिलते
कुछ सुनहरे पल
तो चुपके से
चुरा लेती
पति के बटुए से
और रखती
छुपा-छुपाकर
फ़िर करते खर्च
हम दोनों
साथ-साथ
जीते उन स्वर्णिम पलों को,
जब-जब होता मन
उदास या निराश
"कल्पना" (fan...
"प्रेम"
"बचपन की ओर"
"ज़िन्दगी-इक ख...
"पैसा"
"सफ़र ज़िन्दगी ...
"जादू"
"खौफ़नाक मंज़र"
"मेरे हीरो"
मेरा परिवार
मुकद्दर में मेरे तुम हो या नहीं ये ख़ुदा जाने , दीदार-ए-रुख़सार की इक आस अभी बाकी है मुकद्दर में मेरे तुम हो या नहीं ये ख़ुदा जाने , दीदार-ए-रुख़सार की इक आस अभी बा...
प्यारी वो उसकी बातें भी प्यारी उसकी आवाज़ से भी प्यार हो ही गया। प्यारी वो उसकी बातें भी प्यारी उसकी आवाज़ से भी प्यार हो ही गया।
वरना इस बात का कोई अफ़सोस नहीं कि माँ के तीन भाई हैं और मेरा एक भी नहीं....... वरना इस बात का कोई अफ़सोस नहीं कि माँ के तीन भाई हैं और मेरा एक भी नहीं.......
कल्पना मेरी बिखरने लग गयी है उग्रता, बेचैन चिंता जग गयी है कल्पना मेरी बिखरने लग गयी है उग्रता, बेचैन चिंता जग गयी है
अब मर्ज़ी तुम्हारी है गिरते चलो या बढ़ते चलो। अब मर्ज़ी तुम्हारी है गिरते चलो या बढ़ते चलो।
यह परीक्षा है, बोलो यह परीक्षा है पेपर बाहर है, विद्यार्थ यह परीक्षा है, बोलो यह परीक्षा है पेपर बाहर है, ...
ना अपने से दूर कर पाते। न जाने कैसी आफत है ये यादें। ना अपने से दूर कर पाते। न जाने कैसी आफत है ये यादें।
मन के हरे हार रे संगी, मन के जीते जीत रे l इहि हमर बैरी संगी, इहि हमर मीत रे 2....... मन के हरे हार रे संगी, मन के जीते जीत रे l इहि हमर बैरी संगी, इहि हमर मीत रे ...
जिसके गलत होने पर होगी सारी जिम्मेदारी उसकी। जिसके गलत होने पर होगी सारी जिम्मेदारी उसकी।
आंधी से संघर्ष कब तक हो, कभी तो फुहार सावन की बरसे। आंधी से संघर्ष कब तक हो, कभी तो फुहार सावन की बरसे।
इसलिए बीते दशक के लोगों का दिल खत में बसता है। इसलिए बीते दशक के लोगों का दिल खत में बसता है।
सीख गया सब हाथ पकड़कर बस जैसे बरसों की हो पहचान सीख गया सब हाथ पकड़कर बस जैसे बरसों की हो पहचान
इस क़दर मुझसे बेरुखी क्यों...बस मेरा कुसूर बता देना ! इस क़दर मुझसे बेरुखी क्यों...बस मेरा कुसूर बता देना !
ऐसे खेलते जाते ज़िन्दगी का आखिरी दांव। ऐसे खेलते जाते ज़िन्दगी का आखिरी दांव।
एक बूंद, विशाल सागर में इस से ज्यादा, ऐ बंदे तेरी हस्ती कहां। एक बूंद, विशाल सागर में इस से ज्यादा, ऐ बंदे तेरी हस्ती कहां।
उभरे लहू को कागज़ पर उड़ेलती हूँ तब ऐसे दिल के ज़ख्मों पर मरहम करती हूँ। उभरे लहू को कागज़ पर उड़ेलती हूँ तब ऐसे दिल के ज़ख्मों पर मरहम करती हूँ।
हाँ सनक है इश्क़ में तेरे पर गवारा नहीं मुझे दूरियाँ यूं किसी भी काऱण से तेरी। हाँ सनक है इश्क़ में तेरे पर गवारा नहीं मुझे दूरियाँ यूं किसी भी काऱण से ...
प्यास है दिल में और प्यासी है बारिश भी, रेत है दरमियां और सूख गई है ये शाख भी। प्यास है दिल में और प्यासी है बारिश भी, रेत है दरमियां और सूख गई है ये शाख भी...
घर के काम को नहीं करते मना परिवार के लिये करना सीखना है उसे। घर के काम को नहीं करते मना परिवार के लिये करना सीखना है उसे।
उनके लहजे में परवाह तो होती है मेरे लिए मगर क्यों कोई परवाह नज़र नहीं आती उनके लहजे में परवाह तो होती है मेरे लिए मगर क्यों कोई परवाह नज़र नहीं आती