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Anju Singh

Inspirational


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Anju Singh

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स्वाभिमानी स्त्री

स्वाभिमानी स्त्री

1 min 217 1 min 217

एक स्वाभिमानी स्त्री सबकी हां में हां 

और ना में ना कहना नहीं जानती

 झूठ की दौड़ में वह रिश्तों को नहीं बॉंधती

हां वह सच निभाना जानती है


स्वांग रच कर वह 

बातों को बोलना नहीं जानती

वह तो सिर्फ बेबाकी से 

सच बोलना जानती है


उसे गहने कपड़ों का शौक नहीं

स्वाभिमान ही उसका गहना है

आत्मविश्वास से खुद को है निखारती 

व्यक्तित्व में मुस्कान लाती है


वह अपनें सपनों को पूरा करती है

घर भी बखूबी संभालती है

बस वह सिर्फ किसी की

अनर्गल बातों को नहीं मानती है


वह जी हजूरी पसंद नहीं करती

बेकार किसी के आगे नहीं झुकती

झुकती है सिर्फ वही पर जहां 

रिश्ते ,प्रेम और सच की मजबूरी होती है


फिजूल की बहस वो करती नहीं

तर्क से है वो अपनी बात रखती

अनुशासन में रहकर वह

सच्चाई से जीती है


गलतियों पर वह टोकती है

गलत काम को रोकती है

कितनी भी तकलीफ हो 

वह सब संभालती है


वह नतमस्तक नहीं होती

पौरुषता के आगे

झुक जाती है वह तो 

निस्वार्थ प्रेम के आगे


वह‌ टूट जाती है 

दिखावे और छलावे से

जुड़ नहीं पाती है वह

झूठे प्रेम के भावों से


एक स्वाभिमानी नारी 

जब स्वाभिमान से जीती है

इस पुरुषवादी समाज के लिए

 थोड़ा असहनीय बन जाती है


विचारों से स्वतंत्र होकर

वह आलोचना भी पाती है

पर दृढ़ निश्चय से आगे बढ़कर

हर दर्द पर विजय पाती है


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