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Vikas Sharma

Inspirational

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Vikas Sharma

Inspirational

मानव को धरती की चिंता भारी है

मानव को धरती की चिंता भारी है

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मानव को धरती की चिंता भारी है,

पर्यावरण है खतरे में, धरती को बचाने की जंग जारी है;

नए होर्डिंग, नए ऐड;

सिलेबस में भी शामिल हुआ है,

सेमिनार और आन्दोलन,

लोकल से इंटरनेशनल तक,

कन्वेंशन भी भरमार किया हैI


गाने बन गए, मूवी बन गई;

कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए;

“स्वच्छता“ – चुनावी जुमला बन गई,

पीएचडी हो गई, यूनिवर्सिटी बन गईI


व्यक्तिगत से राष्ट्र तक,

आरोपों की मारामारी है,

मानव को आजकल –

धरती की चिंता भारी हैI


सब कुछ तो करके देख लिया,

शैतान को पाले बैठा है,

झूठे दंभ में फिर भी ऐंठा है,

ये लालच है, जो खतरा है;

धरती, पर्यावरण तो केवल चेहरा बदलेंगे,

तु खुद को बचा, ये तू है – जिसको खतरा हैI


रोक सके तो रोक ले अपने लालच को,

अब तेरे मिटने की बारी है,

और मानव को धरती की चिंता भारी हैI 


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