स्वाभिमान वापिस लाना है
स्वाभिमान वापिस लाना है
खोया हुआ स्वाभिमान वापिस लाना है
हिंद को फिर से विश्व गुरु हमें बनाना है
ये कोरी बातों से मुमकिन न होगा यारों,
अपने श्रम से मुरझाया फूल खिलाना है
कोई हमको यहां पे मित्रों कुछ भी कहे,
पर अपने हाथों में ये तिरंगा अवश्य रहे,
हमें तिरंगे को फ़लक तक ले जाना है
हिंद को दुनिया का सरताज बनाना है
आपस में ये लड़ना-झगड़ना छोड़कर,
एक कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़कर
अपनी अनेकता में एकता को बताना है
खोया हुआ स्वाभिमान वापिस लाना है
हम शेर है, साखी कोई मिट्टी ढेर नहीं है,
दृढ़ जिजीविषा से खोया विश्वास लाना है
दीप से दीप मिला तम साम्राज्य मिटाना है
हिंद को दुनिया का ध्रुव तारा बनाना है
गर पूरे हिंदुस्तान को हमें आगे बढ़ाना है
टांग पकड़ना छोड़कर, हाथ पकड़ जाना है
फिर से देखेगी ये दुनिया हिंद का जलवा,
हिंदुस्तान की सबको मिलकर चलानी हवा
अपना पुराना आत्मविश्वास बस लौटाना है
बन पृथ्वी अंधा होकर निशाना लगाना है
प्रताप का स्वाभिमान घर-घर में जगाना है
शिवा की तलवार बनकर शत्रु को हराना है
खोया हुआ स्वाभिमान वापिस लाना है
इस माटी का कुछ तो कर्ज चुकाना है
देश के समूल ही हमें साखी मिटाना है
तब पूरा होगा स्वराज का स्वप्न पुराना है
